रविवार, 6 सितंबर 2009

लो खिंचवा ली फोटो !

लो ब्लॉग की दुनिया में एक और नमूना टपक पड़ा. वैसे मेरा यह ब्लॉग काफी समय पहले आ जाता यदि मैं आलस छोड़ अपनी एक फोटो खिंचा लेता. कमबख्त एक अदद फोटो ने सारा काम बिगाड़ कर रखा था. वो तो भला हो गाजियाबाद के एक फोटो पत्रकार का जिसने जबरदस्ती कर फोटो खिंच डाली और यह ब्लॉग बन सका.वैसे फोटो की बात चल रही हैं तो एक बात मुझे अचानक याद आ गयी. हुआ यह की कुछ दिन पहले शादी के लियें किसी ने मेरी फोटो मांगी थी लेकिन सारी एल्बम और कंप्यूटर के एक-एक फोल्डर को देखने के बाद भी मेरी कोई खास फोटो हाथ न लग सकी. इस पुरे मामले पर मेरे पिता जी को गुस्सा भी आ रहा था, लेकिन वो मेरे पर गुस्सा करने के बजाएं मेरे भाई पर गुस्सा करने लगे. उन्होंने कहा क्या तुम भैया की कोई फोटो नहीं खिंच सकतें. मेरे भाई का जवाब था की कोई यदि फोटो नहीं खिंचवाता तो मेरा कसूर क्या हैं.वैसे फोटो का महत्व मुझें तब समझ में आया जब में गाजियाबाद में चेतन जी के साथ एक अख़बार में काम कर रहा था. वो जिस तरह फोटो का इस्तेमाल करतें थें उसका में कायल हूँ. पेज पर क्या गजब की फोटो लगवातें थें.

6 टिप्‍पणियां:

  1. मुबारक हो जी अब तो आप की फोटो खिंच गई :)

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  2. सीधा साधा !
    वह भी पत्रकार !!
    अवश्य स्वागत होना चाहिए।

    आशा है कि आप भी मेरी तरह आलस छोड़ कर लिखते रहेंगे।

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  3. स्वागत है आपका हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में... जमे रहिए

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  4. स्वागत है आपका हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में.

    चलो देर लगी, मगर फोटो तो खिंच गई.

    एक ही खिंचवायें हैं कि और भी लगाओगे आगे कभी. हम तो मौका देख देख कर चेंपते रहते हैं कि लोग भूले न!!

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  5. स्वागत है हिन्दी ब्लॉगिंग में बस नियमित लिखते रहें कहीं फ़ोटो खिंचाने जैसा आलस न करते रहें। उड़न तश्तरीजी तो कोई मौका ही नहीं छोड़ते हैं फ़ोटो के लिये उनका बस चले तो एक पर्सनल फ़ोटोग्राफ़र रखवाकर अपने ब्लॉग पर अपडेट करवाते रहें । वैसे समीर जी आईडिया अच्छा है नहीं, :)

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  6. फोटू आपकी बढिया खिंची है.......
    लेकिन आप अपने बारे में विपरीत कथन क्यूं कर रहे हैं.....अब या तो अपने आपको सीधा सीधा इन्सान कहिए या फिर पत्रकार :)
    लिखते रहिए....शुभकामनाऎं!!!!!!!

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