मंगलवार, 1 दिसंबर 2009

रवीश जी से रेकुएस्ट है लापतागंज देखकर कुछ लिखें


अगर किसी को यह नहीं पता है की सब टीवी पर सोमवार से गुरुवार रात १० बजे लापतागंज आता है तो सभी से आग्रह है की यह सीरियल जरूर देखें. ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ की यह दूरदर्शन के पुराने दिनों की याद दिला देगा जब हास्य व्यंग्य से भरपूर धारावाहिक एक सन्देश छोड़ कर जाते थे. यह सन्देश ऐसे होते थे जो अंतर्मन को गुदगुदाने के साथ अंतरात्मा को छकझोर देते थे. कुछ ऐसा ही अंदाज़ है लापतागंज का. सीरियल भी शरद जोशी की कहानियों पर आधारित है तो इसकी खूबियों का पता लगाया जा सकता है.
मैंने अब तक इसके चार एपिसोड देखे हैं. एपिसोड के title है लापतागंज में महापुरुष, लापतागंज में शादी, इल्लिया और नेताजी शर्मिंदा हैं. पहले एपिसोड मे मैंने सीखा की महापुरुष बनने के लियें जरूरी नहीं की कोई खास योग्यता रखनी पड़े. शादी में खर्चा है तभी तो चर्चा है जैसे सामाजिक तंज का मजा लापतागंज में शादी वाले एपिसोड में देखने को मिला. अगर मुकुन्दी बाबु की मेहरारू को शर्मिंदा नेता देखने में आनंद मिला तो मैं भी शर्मिन्दा नेता देखकर खुद शर्मिन्दा होने से नहीं बच पाया. खेतों में इल्लिया हैं तभी तो दिल्ली में बिल्लियाँ हैं जैसी चीज़ भी अन्दर से गुदगुदा गयीं और न्यूज़ चैनेलो से लेकर नेता जी के किसान के प्रति रवैये को समझा कर चली गयी. यह कुछ ऐसी खूबियाँ हैं जो बरबस ही मुझे इस सीरियल की तरफ खिचती हैं.
मेरी सब वालो से एक और रेकुएस्ट है की इस कार्यक्रम की timing change करें क्योंकि इस समय पर ndtv इंडिया पर रवीश कुमार भी न्यूज़ पॉइंट में आ रहे होते हैं जिनके तंज भी काफी रोचक होतें हैं. एक रेकुएस्ट रवीश जी से भी है की वो भी लापतागंज देखे और अपने ब्लॉग में लिखें.

2 टिप्‍पणियां:

  1. मैंने भी इसके कई एपिसोड देखे हैं, साहित्‍यकार द्वारा लिखित रचनाओं का सात्विक आनन्‍द ही कुछ और है। मुझे वो लाइन सबसे अच्‍छी लगी जिसमें कहा गया था कि महापुरुष बनना फुल टाइम जॉब है। कितना गहरा संदेश था। वाकई लापतागंज की चर्चा होनी चाहिए।

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  2. सुना तो बहुत था इस सीरियल के बारें में। पर ये पता नही था कि किस चैनल पर आता है आज ही देख मारेगे जी।

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